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ग्वालियर में अनुकंपा नियुक्ति घोटाला: कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा, 1.25 लाख का जुर्माना

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Updated:
2 hours ago
ग्वालियर में अनुकंपा नियुक्ति घोटाला: कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा, 1.25 लाख का जुर्माना

ग्वालियर जिला कोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। पिता की मौत के बाद बड़े भाई को नौकरी मिलने के बावजूद छोटे भाई ने दूसरी अनुकंपा नियुक्ति ले ली थी। कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा और 1 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

बड़े भाई को मिल चुकी थी अनुकंपा नियुक्ति

मामला ग्वालियर निवासी हरिशंकर श्रीवास्तव से जुड़ा है, जिनका वर्ष 1988 में निधन हो गया था। इसके बाद उनके बड़े बेटे सुनील श्रीवास्तव को साल 1991 में अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी।

छोटे बेटे ने तथ्य छिपाकर ली नौकरी

साल 1995 में छोटे बेटे अनिल श्रीवास्तव ने यह जानकारी छिपा ली कि परिवार के एक सदस्य को पहले ही अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी है। इसके बावजूद उसने सहायक शिक्षक पद पर अनुकंपा नियुक्ति हासिल कर ली।

2017 में हुई शिकायत, जांच के बाद FIR

इस फर्जीवाड़े की शिकायत हरेंद्र सिंह सिकरवार ने वर्ष 2017 में की थी। शिकायत के बाद जांच समिति बनाई गई और 17 अक्टूबर 2018 को ग्वालियर के कोतवाली थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

FIR से पहले ले लिया था VRS

शिकायत के बाद और FIR दर्ज होने से पहले ही आरोपी अनिल श्रीवास्तव ने वर्ष 2017 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। इसके बावजूद मामले की जांच और ट्रायल जारी रहा।

कोर्ट ने सुनाया कड़ा फैसला

सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने माना कि आरोपी ने तथ्य छिपाकर शासन को गुमराह किया। कोर्ट ने अनिल श्रीवास्तव को 10 साल के कठोर कारावास और 1 लाख 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

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