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उज्जैन में गैर-हिंदुओं के मंदिर प्रवेश पर विवाद, संत समाज ने उठाई पाबंदी की मांग

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Updated:
2 hours ago
उज्जैन में गैर-हिंदुओं के मंदिर प्रवेश पर विवाद, संत समाज ने उठाई पाबंदी की मांग

धार्मिक नगरी उज्जैन में गैर-हिंदुओं के मंदिर प्रवेश को लेकर संत समाज ने मांग उठाई है। साधु-संतों और कुछ मंदिर पुजारियों का कहना है कि भारतीय मंदिरों में भी उसी तरह व्यवस्था होनी चाहिए जैसी अन्य धर्मस्थलों में है। इस मांग के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

महाकाल मंदिर से जुड़ी मांग

जूना अखाड़ा से जुड़े संतों ने उज्जैन के महाकाल मंदिर समेत अन्य मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की बात कही है। संतों का कहना है कि मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए।

संतों का तर्क

महामंडलेश्वर शैलेशानंद महाराज जूना अखाड़ा और साधु-सन्यासी समिति के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने कहा कि जिन लोगों की सनातन परंपरा, मूर्ति पूजा और धार्मिक आस्था में विश्वास नहीं है, उन्हें मंदिरों में प्रवेश नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि अन्य धर्मस्थलों में आस्था के आधार पर प्रवेश की व्यवस्था पहले से लागू है।

विधर्मी मानसिकता का आरोप

संत समाज का आरोप है कि कुछ लोग आस्था के बजाय गलत मंशा से मंदिरों में प्रवेश करते हैं। पुजारियों का कहना है कि मंदिरों की मर्यादा और धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए सख्त नियम जरूरी हैं। इस मुद्दे पर स्थानीय अखाड़ों और मंदिर प्रतिनिधियों ने प्रशासन से स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की मांग की है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

संतों की इस मांग पर सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ विक्रम चौधरी ने कहा कि सनातन धर्म किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, हिंदू धर्म एक जीवन पद्धति है और इसके दरवाजे पूरी मानवता के लिए खुले हैं।

धर्म और राजनीति पर बहस

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान समाज को बांटने वाले हैं। वहीं संत समाज का कहना है कि यह मांग धर्म की मर्यादा और परंपरा की रक्षा से जुड़ी है। फिलहाल यह मुद्दा धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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